रजिस्ट्री दरो मे कमी संभव, इस हफ्ते उम्मीद,जिले के मूल्यांकन टीम लगी हैँ विचार मे,, चौपट हैँ अभी रजिस्ट्रीया

रायपुर,जनवरी। सरकार जमीन की रजिस्ट्री दरें कम कर सकती है। इस सिलसिले में जिलों में आपत्तियों का परीक्षण चल रहा हैं। बताया गया कि केन्द्रीय मूल्यांकन समिति हफ्ते भर में फैसला करेगी।

आईजी (रजिस्ट्रेशन) पुष्पेन्द्र मीणा ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में बताया कि नई गाइडलाइन दरों को लेकर आए सुझावों पर जिले की मूल्यांकन कमेटी विचार कर रही है। इसके बाद केन्द्रीय मूल्यांकन कमेटी को अपनी अनुशंसा भेजेगी, इस पर हफ्ते फैसला कर लिया जाएगा। भर में

बताया गया कि जमीन की नई रजिस्ट्री दरों (गाइडलाइन) पर घोषणा पर सबसे ज्यादा आपत्तियां चार जिले रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और राजनांदगांव में आई है।

सरकार ने सात साल बाद जमीन की गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की है। रजिस्ट्री दरों में कई जगहों

पर एक हजार फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। इसका चौतरफा विरोध हुआ, और कुछ संशोधन किए गए। साथ ही दरों पर 31 दिसंबर तक आपत्तियां बुलाई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के ज्यादातर जिलों में गाइड लाइन दरों को लेकर आपत्तियां आई हैं। सबसे ज्यादा आपत्ति रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, और राजनांदगांव जिले में आई है। अंबिकापुर,

हफ्ते भर में फैसला संभव

जशपुर, रायगढ़ और कोरबा में भी रजिस्ट्री दरों को लेकर आपत्तियां आईं हैं।

आपत्तियों में यह कहा गया कि जमीन की वास्तविक कीमत से अधिक गाइडलाइन दर हो गई है। सूत्रों के मुताबिक आपत्तियों का परीक्षण चल रहा है। कहा जा रहा है कि कुछ जगहों पर जहां गाइडलाइन की दरें ज्यादा बढ़ गई है, वहां दरों में कमी की जा सकती है।

चर्चा है कि न्यूनतम 20 फीसदी तक की कमी हो सकती है। कुछ जगहों पर गाइडलाइन दरों सौ फीसदी तक कमी हो सकती है। नई गाइडलाइन दरों में भारी वृद्धि के चलते जमीन के कारोबार पर असर पड़ा है। रायपुर जैसे जिलों में रजिस्ट्री तकरीबन ठप पड़ गई है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल, और कई विधायकों ने गाइडलाइन दरों पर असहमति जताई है। बृजमोहन अग्रवाल ने तो सीएम विष्णु देव साय को चिट्ठी लिखकर सीधे सीधे पत्र लिखकर नई गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का आग्रह कर चुके हैं।

दूसरी तरफ, जमीन के कारोबारी नई गाइडलाइन दरों के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की भी तैयारी कर रहे हैं। इस सिलसिले में कारोबारियों की राज्यसभा सदस्य, और सुप्रीम कोर्ट के वकील विवेक तन्खा से चर्चा हो चुकी है। इस सिलसिले गाइडलाइन दरों से जुड़े नियमों को खंगाला जा रहा है।

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